नेपाल बाढ़ आपदा पर संयुक्त राष्ट्र जिनेवा में UNICEF और IFRC की जानकारीनेपाल में बाढ़ के बाद राहत और पुनर्वास की स्थिति पर UNICEF और IFRC की जानकारी।

बाढ़ और हिमालयी आपदा के छह हफ्ते बाद भी उबर नहीं पाए प्रभावित परिवार, बच्चों की पढ़ाई और रोज़गार पर संकट

UNICEF और रेड क्रॉस ने दी हालात की जानकारी, नेपाल के प्रभावित इलाकों तक लगातार मदद पहुंचाने की अपील! देखिए पूरी रिपोर्ट

नेपाल की बाढ़ का कहर: छह हफ्ते बाद भी तबाही से जूझ रहे परिवार

नेपाल में अगस्त के दौरान आई विनाशकारी बाढ़ के छह सप्ताह बाद भी प्रभावित समुदाय सामान्य जीवन की ओर लौटने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस एवं रेड क्रिसेंट सोसायटी महासंघ (IFRC) ने प्रभावित लोगों तक लगातार सहायता पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र जिनेवा मल्टीमीडिया न्यूज़रूम की 9 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, इस आपदा में कम से कम 1,400 लोगों की मौत हुई, जिनमें 84 बच्चे शामिल हैं, जबकि करीब 5,300 लोग अब भी लापता हैं।

हिमालयी नदी में ग्लेशियर और चट्टानें गिरने से मची तबाही

रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त के आखिर में हिमनद की बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा टूटकर भोतेकोशी, ऊपरी त्रिशूली और नारायणी-गंडक नदी प्रणालियों में जा गिरा। इसके बाद आई तेज बाढ़ ने घरों और पुलों को बहा दिया। कई प्रभावित इलाकों में अब भी पुनर्निर्माण और राहत पहुंचाने में कठिनाइयां बनी हुई हैं।

UNICEF के प्रवक्ता जेम्स एल्डर ने बताया कि बाढ़ से नेपाल में 32,000 से अधिक बच्चे प्रभावित हुए हैं। उन्होंने 16 वर्षीय सहारा का उदाहरण दिया, जिसकी मां बाढ़ में बह गईं और उनकी मौत हो गई। सहारा अब मां के बिना जीवन बिताने के दर्द से जूझ रही है।

UNICEF और IFRC की नेपाल आपदा संबंधी आधिकारिक वीडियो रिपोर्ट।

दूरदराज के इलाकों में राहत पहुंचाना अब भी चुनौती

IFRC की आपदा, जलवायु और संकट मामलों की निदेशक कैरोलिन होल्ट के अनुसार, रसुवा के कुछ समुदायों तक पहुंचना अब भी कठिन है। सबसे अलग-थलग इलाकों में राहत सामग्री हवाई मार्ग से पहुंचाई जा रही है।

सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में परिवारों को बाजार व्यवस्था बाधित होने, परिवहन महंगा होने और जरूरी वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क और संचार सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है, लेकिन प्रभावित परिवारों की जरूरतें अभी भी व्यापक हैं।

होल्ट ने जोर दिया कि राहत कार्यों के साथ लोगों को दोबारा अपने जीवन को व्यवस्थित करने में भी मदद देनी होगी। प्रभावित परिवारों को रहने की सुरक्षित जगह, आजीविका और बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू होने की स्पष्टता चाहिए।

जलवायु परिवर्तन से बढ़ रहा हिमालयी आपदाओं का खतरा

UNICEF के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के मुताबिक, हिमालय वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। ग्लेशियर सिकुड़ रहे हैं और जमी हुई जमीन पिघल रही है, जिससे पहाड़ी ढलानों को स्थिर रखने वाली प्राकृतिक संरचना कमजोर हो रही है। इससे भविष्य में इस तरह की आपदाओं का जोखिम बढ़ सकता है।

रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि नेपाल का वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान केवल लगभग 0.1 प्रतिशत है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन से गंभीर रूप से प्रभावित देशों तक अंतरराष्ट्रीय सहायता और नुकसान की भरपाई के लिए किए गए वादों को वास्तविक मदद में बदलना महत्वपूर्ण है।

UNICEF और IFRC की अपील का मुख्य संदेश है कि नेपाल में राहत से पुनर्वास की ओर तेजी से बढ़ने की जरूरत है। प्रभावित परिवारों, विशेषकर बच्चों, को लंबे समय तक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है, ताकि वे सुरक्षित जीवन, शिक्षा और आजीविका दोबारा हासिल कर सकें।

SOURCE: UN Geneva | UNICEF | IFRC

PHOTO/VIDEO: UN Geneva / UNTV CH

No Opinion | No Personal Claim | Only Reporting | India Time Report TV™

यह समाचार संयुक्त राष्ट्र जिनेवा मल्टीमीडिया न्यूज़रूम की UNICEF और IFRC संबंधी आधिकारिक रिपोर्ट पर आधारित है। India Time Report TV™ सार्वजनिक एवं आधिकारिक जानकारी के आधार पर तथ्यात्मक, निष्पक्ष एवं जिम्मेदार रिपोर्टिंग के लिए प्रतिबद्ध है। India Time Report TV™ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है।

Thank you for connecting with India Time Report TV™.

Avatar photo

By Harish Kumar

Harish Kumar is the Director of India Time Report Media Network. He oversees editorial operations and is committed to factual, impartial and responsible journalism. His focus is on official announcements, national affairs, technology, business and international news.

You missed