कांगो में इबोला प्रकोप और WHO की जेनेवा ब्रीफिंगकांगो में इबोला प्रकोप और WHO की जेनेवा ब्रीफिंग का दृश्य। | UN Geneva / WHO

समय पर इलाज नहीं मिला तो बढ़ सकता है खतरा, मरीजों तक ऑक्सीजन पहुंचाना बनी बड़ी चुनौती, वैक्सीन का शोध भी जारी

कांगो में इबोला से हालात पर WHO की नजर, 50 केंद्रों में इलाज की व्यवस्था; क्या बढ़ रहा है खतरा? जानिए पूरी खबर

कांगो। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक मौजूदा प्रकोप में पुष्टि किए गए मामलों की संख्या पहली बार 8 हजार के पार पहुंच गई है। WHO की 29 सितंबर की जेनेवा ब्रीफिंग के अनुसार अब तक 8,067 पुष्ट मामले और 3,901 मौतें दर्ज की गई हैं।

WHO ने बताया कि इस प्रकोप में मृत्यु दर 48 प्रतिशत से ज्यादा है। हालांकि कुछ इलाकों में संक्रमण की रफ्तार कम होने के संकेत मिले हैं, लेकिन मामलों की संख्या अभी भी ऊंची बनी हुई है।

समय पर इलाज सबसे बड़ी चुनौती

WHO के स्वास्थ्य आपात कार्यक्रम की डॉ. जेनेट डियाज ने जेनेवा में पत्रकारों को बताया कि इबोला के मरीजों के लिए समय पर इलाज तक पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण है। उनके मुताबिक कई लोग समय पर स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पा रहे हैं और कुछ मरीज घर या समुदाय में ही दम तोड़ रहे हैं।

इलाज में देरी के पीछे स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच, मरीजों को रेफर करने और समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने जैसी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

कांगो में इबोला के हालात और मरीजों के इलाज को लेकर WHO की जेनेवा ब्रीफिंग। | UN Geneva / WHO

50 उपचार केंद्रों में 1,600 से ज्यादा बेड

WHO के मुताबिक इबोला के मरीजों के लिए उपचार क्षमता को शुरुआती कुछ बेड से बढ़ाकर सात प्रभावित प्रांतों के 50 उपचार केंद्रों में 1,600 से ज्यादा बेड तक किया गया है। आगे इसे 2 हजार से ज्यादा बेड तक बढ़ाने की योजना बताई गई है।

WHO और उसके सहयोगियों ने करीब 400 स्वास्थ्यकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया है। इसके लिए बुनीया में प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया गया है, ताकि इबोला मरीजों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

ऑक्सीजन को लेकर भी बड़ी चुनौती

WHO ने गंभीर रूप से बीमार इबोला मरीजों के उपचार में ऑक्सीजन की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया है। संगठन के अनुसार कई स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन की उपलब्धता अभी भी भरोसेमंद नहीं है, खासकर आपात स्थिति में।

WHO का कहना है कि ऑक्सीजन की व्यवस्था केवल सिलेंडर या उपकरण उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसके लिए मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, भरोसेमंद आधारभूत ढांचा, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी और मरीजों तक लगातार आपूर्ति पहुंचाने वाली व्यवस्था जरूरी है।

वैक्सीन पर शोध जारी

मौजूदा इबोला वायरस बुंडिबुग्यो वायरस के खिलाफ अभी कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। हालांकि वैक्सीन परीक्षण जारी हैं।

WHO ने बताया कि पिछले सप्ताह 20 हजार एर्वेबो वैक्सीन की खुराक इटुरी प्रांत में शोध आधारित टीकाकरण कार्यक्रम के लिए आवंटित की गई हैं। यह वैक्सीन पहले इबोला के जायरे वायरस के खिलाफ प्रभावी साबित हुई है।

WHO के अनुसार कांगो में मौजूदा इबोला प्रकोप से निपटने में शुरुआती पहचान, समय पर मरीजों को स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाना, बेहतर उपचार क्षमता और ऑक्सीजन जैसी जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता अहम बनी हुई है।

SOURCE: WHO / UN Geneva

PHOTO/VIDEO: UN Geneva / WHO

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यह समाचार 29 सितंबर 2026 को जेनेवा में WHO की ओर से दी गई जानकारी और संयुक्त राष्ट्र जेनेवा मल्टीमीडिया न्यूज़रूम की आधिकारिक सामग्री के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दिए गए मामले, मौतों, उपचार क्षमता और वैक्सीन संबंधी आंकड़े संबंधित आधिकारिक स्रोत के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। India Time Report TV™ का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग करना है। India Time Report TV™ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है।

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By Harish Kumar

Harish Kumar is the Director of India Time Report Media Network. He oversees editorial operations and is committed to factual, impartial and responsible journalism. His focus is on official announcements, national affairs, technology, business and international news.

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