2026 में दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में सतही ओजोन प्रदूषण का स्तर2026 में दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में सतही ओजोन के संपर्क का वैश्विक विश्लेषण। | PHOTO CAMS/ECMWF

एशिया में ओजोन का सबसे बड़ा असर, 60% आबादी बेहद खराब स्तर में फंसी

जंगलों की आग से धुआं हजारों किलोमीटर दूर तक पहुंचा, सहारा की धूल ने भी मचाई परेशानी ! जानने के लिए देखें पूरी खबर

बॉन। साल 2026 में दुनिया के कई हिस्सों में बढ़ती गर्मी, मानव गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण, जंगलों की आग और धूल के लंबे सफर ने हवा की गुणवत्ता को लेकर नई चिंता सामने रखी है। कॉपरनिकस एटमॉस्फियर मॉनिटरिंग सर्विस (CAMS) की नई वैश्विक समीक्षा के मुताबिक, इस साल अब तक दुनिया की करीब 40 प्रतिशत आबादी ग्राउंड-लेवल ओजोन के खतरनाक स्तरों के संपर्क में आई है।

ग्राउंड-लेवल ओजोन ऊपर वायुमंडल की सुरक्षा करने वाली ओजोन परत से अलग है। यह जमीन के पास तब बनती है, जब नाइट्रोजन ऑक्साइड और वाष्पशील कार्बनिक यौगिक जैसे प्रदूषक तेज धूप और अधिक तापमान की स्थिति में रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं।

CAMS की Atmosphere Watch समीक्षा ने 2026 के पहले आठ महीनों में ओजोन, जंगलों की आग के धुएं और रेगिस्तानी धूल के वैश्विक असर का विश्लेषण किया है। इसके लिए उपग्रहों, जमीन पर मौजूद निगरानी नेटवर्क, विमानों और वायुमंडलीय मॉडल से मिले आंकड़ों को इस्तेमाल किया गया।

एशिया पर सबसे ज्यादा दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक एशिया ओजोन प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र रहा। विश्लेषण में कहा गया है कि 2026 में एशिया की करीब 60 प्रतिशत आबादी बेहद खराब स्तर के ओजोन संपर्क में रही, जबकि खराब और बेहद खराब स्तरों को मिलाकर यह हिस्सा करीब 90 प्रतिशत तक पहुंचता है।

यूरोप और उत्तरी अमेरिका में भी ओजोन का असर सामने आया। यूरोप में जून से अगस्त के बीच लगातार गर्मी की लहरों ने ओजोन बनने की परिस्थितियों को बढ़ाया। CAMS के विश्लेषण के अनुसार यूरोप की करीब 50 प्रतिशत आबादी खराब, बेहद खराब या अत्यंत खराब ओजोन स्तर के संपर्क में रही।

सिर्फ स्थानीय प्रदूषण नहीं, हजारों किलोमीटर का सफर

इस रिपोर्ट का एक बड़ा पहलू यह है कि वायु प्रदूषण किसी एक शहर या देश तक सीमित नहीं रहा। जंगलों की आग का धुआं और रेगिस्तानी धूल हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर दूसरे क्षेत्रों की हवा को प्रभावित करते रहे।

उत्तरी अमेरिका में कनाडा और पश्चिमी अमेरिका की जंगलों की आग से निकला धुआं जुलाई में बड़ी दूरी तय करते हुए उत्तरी अमेरिका के कई हिस्सों तक पहुंचा। कुछ धुएं के गुबार अटलांटिक पार कर यूरोप तक भी पहुंचे और वहां पीएम2.5 की मात्रा बढ़ाने में योगदान दिया।

दक्षिण-पूर्व एशिया में मौसमी आग के कारण थाईलैंड और लाओस समेत कई देशों में सीमा-पार धुंध का असर देखा गया। वहीं सहारा से उठी धूल भी उत्तर अफ्रीका से आगे अटलांटिक और कैरेबियन क्षेत्र तक पहुंची।

शहरों पर भी दिखा असर

CAMS के विश्लेषण में दुनिया के कई बड़े शहरों को ओजोन प्रदूषण के अलग-अलग स्तरों के साथ दिखाया गया है। एशिया में ढाका, लाहौर, बीजिंग और चोंगकिंग जैसे शहरों के साथ दिल्ली भी विश्लेषण में शामिल है।

उत्तरी अमेरिका में मेक्सिको सिटी अत्यंत खराब ओजोन स्तर से प्रभावित प्रमुख शहरों में शामिल रही। दक्षिण अमेरिका में रियो डी जेनेरो भी अत्यंत खराब स्तर वाले शहरों में दर्ज किया गया।

रिपोर्ट में इसके साथ यह भी बताया गया है कि ओशिनिया ओजोन संपर्क के लिहाज से अपेक्षाकृत कम प्रभावित क्षेत्रों में रहा, जबकि दक्षिण अमेरिका की करीब 81 प्रतिशत आबादी अच्छे या संतोषजनक ओजोन स्तर के संपर्क में रही।

गर्मी और प्रदूषण का कनेक्शन

CAMS के मुताबिक ओजोन स्वयं भी एक ग्रीनहाउस गैस है। गर्मी बढ़ने पर ओजोन बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं, जबकि मानव गतिविधियों और जंगलों की आग से निकलने वाले प्रदूषक इसके निर्माण में योगदान कर सकते हैं।

यही वजह है कि CAMS ने वायु गुणवत्ता, जलवायु और स्वास्थ्य को अलग-अलग मुद्दों के बजाय आपस में जुड़े हुए विषयों के रूप में देखने पर जोर दिया है। ECMWF के महानिदेशक फ्लोरियन पापेनबर्गर ने भी कहा कि जंगलों की आग का धुआं, ओजोन और धूल सीमाओं से बंधे नहीं हैं और दूर-दराज की आबादी तक पहुंच सकते हैं।

CAMS की यह समीक्षा 2026 के पहले आठ महीनों के वैश्विक वायुमंडलीय हालात की तस्वीर पेश करती है और दिखाती है कि वायु प्रदूषण का असर स्रोत वाले इलाके से बहुत दूर तक पहुंच सकता है।

SOURCE: Copernicus Atmosphere Monitoring Service (CAMS) | ECMWF | European Commission

PHOTO SOURCE: CAMS / ECMWF

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यह समाचार Copernicus Atmosphere Monitoring Service (CAMS) और European Centre for Medium-Range Weather Forecasts (ECMWF) की उपलब्ध आधिकारिक सामग्री और विश्लेषण पर आधारित है। समाचार में दिए गए आंकड़े और निष्कर्ष संबंधित आधिकारिक विश्लेषण के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। India Time Report TV™ का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग करना है। India Time Report TV™ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है।

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By India Time Report TV Desk

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