India Tiger Conservation Representative Imageभारत के बाघ संरक्षण की सफलता को दर्शाती प्रतीकात्मक तस्वीर

दुनिया के करीब 70% जंगली बाघ भारत में, विज्ञान आधारित संरक्षण मॉडल बना वैश्विक उदाहरण

Project Tiger से लेकर AI आधारित मॉनिटरिंग तक, भारत ने संरक्षण का नया मानक स्थापित किया

DATE: 28 July 2026

CREDIT:Harish Kumar | Director, India Time Report Media Network

LOCATION: New Delhi

भारत ने बाघ संरक्षण के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी वैश्विक पहचान मजबूत की है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस (29 जुलाई) से पहले जारी आधिकारिक बैकग्राउंडर में बताया गया है कि आज दुनिया के करीब 70 प्रतिशत जंगली बाघ भारत में पाए जाते हैं। पिछले दो दशकों में विज्ञान आधारित संरक्षण, मजबूत नीतियों, आधुनिक तकनीक, संस्थागत निगरानी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी ने भारत को बाघ संरक्षण के क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश बना दिया है।

बाघ केवल भारत का राष्ट्रीय पशु ही नहीं, बल्कि देश की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत का भी प्रतीक है। शीर्ष शिकारी (Apex Predator) के रूप में बाघ जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बाघों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा के साथ-साथ जंगल, नदियाँ, मिट्टी, जल स्रोत और हजारों अन्य वन्य प्रजातियाँ भी सुरक्षित रहती हैं। यही कारण है कि भारत ने बाघ संरक्षण को केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित न रखकर पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से भी जोड़ा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2006 के बाद से भारत में बाघों की संख्या दोगुने से भी अधिक हो चुकी है। All India Tiger Estimation 2022 के अनुसार देश में 3,682 जंगली बाघ दर्ज किए गए हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा वैज्ञानिक वन्यजीव सर्वेक्षण माना जाता है। इस सर्वे के दौरान 20 राज्यों में छह लाख चालीस हजार किलोमीटर से अधिक क्षेत्र का सर्वेक्षण किया गया, जिससे बाघों के साथ उनके आवास, शिकार प्रजातियों और पारिस्थितिकी तंत्र का भी विस्तृत अध्ययन किया गया।भारत की इस सफलता के पीछे Project Tiger की बड़ी भूमिका रही है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत संचालित यह केंद्र प्रायोजित योजना देश में बाघों के प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, वैज्ञानिक प्रबंधन और राज्यों को तकनीकी तथा वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है।

वर्तमान में देश के 18 राज्यों में फैले 58 टाइगर रिजर्व लगभग 84,500 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 2.56 प्रतिशत हिस्सा है।बाघ संरक्षण को और प्रभावी बनाने के लिए National Tiger Conservation Authority (NTCA) पूरे देश में संरक्षण योजनाओं की निगरानी करती है। यह संस्था टाइगर रिजर्वों के प्रबंधन, वैज्ञानिक मूल्यांकन, मानक संचालन प्रक्रियाओं और संरक्षण योजनाओं को लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी व्यवस्था के कारण देशभर में संरक्षण प्रयासों में एकरूपता और जवाबदेही सुनिश्चित हुई है।

भारत ने बाघों की निगरानी में आधुनिक तकनीक का भी व्यापक उपयोग किया है। M-STrIPES जैसी डिजिटल प्रणाली GPS, GPRS और रिमोट सेंसिंग तकनीक के माध्यम से जंगलों की निगरानी करती है, जबकि Camera Trap Data Repository and Analysis Tool (CaTRAT) कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की मदद से कैमरा ट्रैप से प्राप्त लाखों तस्वीरों का विश्लेषण कर बाघों की पहचान और निगरानी को अधिक सटीक बनाता है। इससे संरक्षण कार्यों में पारदर्शिता और वैज्ञानिक आधार दोनों मजबूत हुए हैं।भारत केवल अपने देश तक सीमित नहीं है बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बाघ संरक्षण में नेतृत्व कर रहा है।

नेपाल, भूटान, रूस, चीन, म्यांमार, केन्या, दक्षिण अफ्रीका, कंबोडिया, ग्वाटेमाला और अन्य देशों के साथ सहयोग के माध्यम से सीमा पार वन्यजीव संरक्षण, तकनीकी सहयोग और वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अलावा भारत Global Tiger Forum (GTF) का मुख्यालय भी है, जो दुनिया का एकमात्र अंतर-सरकारी संगठन है जो विशेष रूप से बाघ संरक्षण के लिए कार्य करता है।भारत की पहल पर गठित International Big Cat Alliance (IBCA) भी वैश्विक स्तर पर सात बड़ी बिल्ली प्रजातियों—बाघ, शेर, तेंदुआ, हिम तेंदुआ, चीता, जगुआर और प्यूमा—के संरक्षण के लिए देशों और वैज्ञानिक संस्थानों को एक मंच पर ला रही है।

भारत का उद्देश्य अपने संरक्षण अनुभव को अन्य देशों के साथ साझा कर वैश्विक जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना है।प्रबंधन की गुणवत्ता को परखने के लिए देश में Management Effectiveness Evaluation (MEE) प्रणाली लागू की गई है। वर्ष 2022 तक 51 टाइगर रिजर्व का मूल्यांकन किया जा चुका है, जिनमें 12 रिजर्व को “Excellent” श्रेणी मिली।

यह प्रणाली संरक्षण कार्यों की गुणवत्ता, प्रबंधन, सुरक्षा और परिणामों का मूल्यांकन कर भविष्य की रणनीतियों को और बेहतर बनाने में मदद करती है।भारत का बाघ संरक्षण मॉडल आज दुनिया के लिए एक उदाहरण माना जा रहा है। विज्ञान आधारित नीति, आधुनिक तकनीक, मजबूत संस्थागत व्यवस्था, स्थानीय समुदायों की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के कारण भारत ने न केवल बाघों की संख्या बढ़ाई है, बल्कि जंगलों और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा को भी नई मजबूती दी है। अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर यह उपलब्धि भारत की पर्यावरण संरक्षण के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।

SOURCE: PIB

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By Harish Kumar

Harish Kumar is the Director of India Time Report Media Network. He oversees editorial operations and is committed to factual, impartial and responsible journalism. His focus is on official announcements, national affairs, technology, business and international news.