दक्षिण सूडान में भूख के संकट को दर्शाती WFP की तस्वीरWFP अधिकारी मैथ्यू हॉलिंगवर्थ की प्रेस ब्रीफिंग के साथ दक्षिण सूडान में मानवीय संकट से प्रभावित परिवार की तस्वीर।

WFP की चेतावनी—हिंसा, मौसम की मार और घटती मानवीय मदद ने बढ़ाई मुश्किल

22 लाख बच्चों और 12 लाख गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं को तत्काल पोषण सहायता की जरूरत

दक्षिण सूडान। दक्षिण सूडान में भूख का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) ने चेतावनी दी है कि हिंसा, विस्थापन, आर्थिक मुश्किलें, खराब मौसम और पड़ोसी सूडान का संकट मिलकर लाखों लोगों की स्थिति को और कमजोर कर रहे हैं। WFP के मुताबिक देश में करीब 78 लाख लोग, यानी आधी से ज्यादा आबादी, हर दिन पर्याप्त भोजन जुटाने के लिए संघर्ष कर रही है।

WFP के सहायक कार्यकारी निदेशक मैथ्यू हॉलिंगवर्थ ने जिनेवा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि मानवीय सहायता के संसाधन भी तेजी से कम हो रहे हैं। उन्होंने दक्षिण सूडान की अपनी हालिया यात्रा के दौरान देखी स्थिति का भी जिक्र किया।

दक्षिण सूडान में भूख और मानवीय संकट पर WFP की रिपोर्ट।

22 लाख बच्चों को तत्काल पोषण सहायता की जरूरत

WFP के अनुसार दक्षिण सूडान में 22 लाख बच्चों और 12 लाख गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाओं को तत्काल पोषण सहायता की जरूरत है।

संगठन ने चेतावनी दी है कि अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध नहीं हुए तो अक्टूबर तक 10 लाख और कमजोर लोगों की जीवनरक्षक खाद्य एवं पोषण सहायता तक पहुंच प्रभावित हो सकती है।

‘सुपर अल नीनो’ से खेती पर भी असर

WFP के मुताबिक दक्षिण सूडान में इस साल मौसम की मार भी संकट को बढ़ा रही है। हॉलिंगवर्थ ने बताया कि ‘सुपर अल नीनो’ का असर देश में पहले से दिखाई दे रहा है। यहां तक कि ज्यादा उपज देने वाले कृषि क्षेत्रों में भी सूखे के कारण फसलें खराब हुई हैं और पैदावार कम हुई है।

इस मौसम का असर सिर्फ दक्षिण सूडान तक सीमित नहीं है। WFP ने पड़ोसी सूडान, इरिट्रिया, इथियोपिया, युगांडा और केन्या में भी खाद्य सुरक्षा पर इसके प्रभाव की चेतावनी दी है।

सूडान से हर सप्ताह हजारों लोग पहुंच रहे

पड़ोसी सूडान में जारी संघर्ष और विस्थापन का सीधा असर दक्षिण सूडान पर भी पड़ रहा है। WFP के मुताबिक हर सप्ताह करीब 3,000 शरणार्थी और पहले सूडान में रह चुके दक्षिण सूडानी लोग सुरक्षा, भोजन, पानी और आश्रय की तलाश में सीमा पार कर दक्षिण सूडान पहुंच रहे हैं।

हॉलिंगवर्थ ने अपर नाइल राज्य के रेंक इलाके में महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों से मुलाकात का जिक्र किया। उनके अनुसार कई लोग लड़ाई से बचने के लिए कई दिनों और कभी-कभी हफ्तों तक पैदल यात्रा करके पहुंचे और खुद भी बेहद कमजोर तथा भूखे थे।

नदी के रास्ते मदद पहुंचाना भी मुश्किल

मानवीय सहायता और खाद्य सामग्री को नील नदी के रास्ते पहुंचाने में भी दिक्कतें बनी हुई हैं। WFP के मुताबिक रास्ते में अवैध चौकियों और सैनिकों द्वारा कथित अवैध वसूली के कारण परिवहन की लागत बढ़ रही है और सहायता पहुंचने में देरी हो रही है।

अपर नाइल राज्य की राजधानी मलाकाल में स्थिति और कठिन बताई गई है। WFP के अनुसार स्थानीय स्तर पर उगने वाली कुछ सब्जियों के अलावा दूसरी खाद्य सामग्री को वहां पहुंचाना महंगा पड़ रहा है। संगठन का कहना है कि परिवहन लागत और रास्ते की बाधाओं का असर अब लोगों की जिंदगी पर भी पड़ रहा है।

SOURCE: UNOG / WFP

PHOTO: UNOG / WFP | Video Frame

VIDEO SOURCE: UNTV CH

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यह समाचार संयुक्त राष्ट्र के जिनेवा मल्टीमीडिया न्यूज़रूम और विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दिए गए आंकड़े और दावे WFP के आधिकारिक बयान के अनुसार प्रस्तुत किए गए हैं। India Time Report TV™ का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग करना है। India Time Report TV™ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है।

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By India Time Report TV Desk

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