ईरानी तेल टैंकर M/T Kylo पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का दृश्यU.S. Central Command द्वारा जारी वीडियो में ईरानी तेल कैरियर M/T Kylo पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का दृश्य।

ईरानी मिसाइल हमले के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई, एक टैंकर पूरी तरह नष्ट और दो को निष्क्रिय करने का दावा

हॉर्मूज में बढ़ा तनाव, तेल-गैस सप्लाई पर फिर खतरा; क्या युद्ध खत्म होने के बजाय और बड़े टकराव की ओर बढ़ रहा है?

ईरान। ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध में एक बार फिर समुद्र से बड़ा हमला सामने आया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने 5 सितंबर को ईरान के तीन क्रूड ऑयल टैंकरों पर कार्रवाई का वीडियो जारी किया है। अमेरिका के मुताबिक यह हमला ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की ओर से दो अमेरिकी नौसैनिक जहाजों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने के बाद किया गया।

CENTCOM के मुताबिक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर ने ईरानी हमलों को सफलतापूर्वक टाला और किसी अमेरिकी सैन्यकर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा। इसके बाद अमेरिकी सेना ने तीन ईरानी क्रूड ऑयल कैरियरों को निशाना बनाया।

CENTCOM द्वारा जारी वीडियो में ईरानी तेल कैरियर M/T Kylo पर अमेरिकी कार्रवाई का दृश्य।

CENTCOM ने जारी किया हमला दिखाने वाला वीडियो

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कार्रवाई का 44 सेकेंड का आधिकारिक वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में M/T Kylo समेत ईरानी तेल कैरियर पर अमेरिकी कार्रवाई और आग के दृश्य दिखाई देते हैं। CENTCOM की वीडियो गैलरी में इसे 5 सितंबर 2026 की कार्रवाई का आधिकारिक वीडियो बताया गया है।

तीन टैंकरों पर कार्रवाई, एक पूरी तरह नष्ट

CENTCOM के मुताबिक M/T Downy को Kharg Island के तट के पास और M/T Stark 1 को Jask के पास स्थायी रूप से निष्क्रिय किया गया। वहीं M/T Kylo, जिसे CENTCOM ने खाली क्रूड ऑयल कैरियर बताया है, को Gulf of Oman में कई महत्वपूर्ण हिस्सों पर हमला कर पूरी तरह संचालन से बाहर कर दिया गया। CENTCOM का कहना है कि चालक दल को जहाज छोड़ने का निर्देश दिए जाने के बाद कार्रवाई की गई।

अमेरिका की सीधी चेतावनी—हमारे जहाजों पर हमला हुआ तो कीमत और बढ़ेगी

CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर अमेरिकी जहाजों पर हमला जारी रहा तो अमेरिका आर्थिक और सैन्य कीमत बढ़ाने से पीछे नहीं हटेगा। CENTCOM ने इस कार्रवाई को IRGC को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने वाली रणनीति से भी जोड़ा है।

यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब संघर्ष केवल जमीन या हवाई हमलों तक सीमित नहीं रह गया है। तेल टैंकर और समुद्री रास्ते सीधे युद्ध का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

क्या Hormuz अब युद्ध का सबसे बड़ा मोर्चा बन गया?

इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा असर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज पर दिखाई दे रहा है। Reuters के अनुसार 4 सितंबर को Hormuz से केवल चार commodity vessels गुजरे, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत 15 जहाज प्रतिदिन था। युद्ध से पहले इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से लगभग 125 वाणिज्यिक जहाज रोज गुजरते थे।

तेल बाजार भी इस तनाव का असर महसूस कर रहा है। Reuters के अनुसार 2 सितंबर को Brent crude लगभग 95.63 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था और बाजार में Hormuz से आपूर्ति बाधित होने की चिंता बनी हुई थी।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

इस युद्ध का असर भारत पर भी सीधा पड़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही संसद में कह चुके हैं कि Hormuz में जहाजों की आवाजाही कठिन होने से भारत के लिए कच्चा तेल, गैस, उर्वरक और समुद्री व्यापार चिंता का विषय है। भारत ने लगातार युद्धविराम, बातचीत और Hormuz में सुरक्षित नौवहन की वकालत की है।

ताजा घटनाक्रम में भारत के लिए एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि Hormuz से जुड़े जोखिमों के बीच Qatar और UAE से LNG की कुछ खेपों को Strait के बाहर ship-to-ship transfer के जरिए भारत और जापान की ओर भेजने की व्यवस्था की गई है। Reuters के अनुसार एक ऐसी LNG खेप भारत पहुंचने के लिए भेजी गई।

दुनिया के विशेषज्ञ क्या संकेत दे रहे हैं?

ताजा अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में सबसे बड़ी चिंता यह है कि अमेरिका और ईरान के बीच जवाबी कार्रवाई का चक्र फिर तेज हो गया है। Financial Times के विश्लेषण के अनुसार दोनों पक्षों के बीच पिछले कुछ दिनों की घटनाएं उस तनाव को दिखाती हैं जिसमें Hormuz, समुद्री सुरक्षा और ईरान के तेल निर्यात पर दबाव एक-दूसरे से जुड़ गए हैं। विश्लेषकों के अनुसार बिना समझौते के यह गतिरोध आगे भी लंबा खिंच सकता है।

दूसरी ओर, समुद्री सुरक्षा पर काम कर रहे विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार Hormuz में अभी भी मिसाइल, ड्रोन और संभावित समुद्री बारूदी सुरंगों का खतरा बना हुआ है। इससे सिर्फ युद्धपोत ही नहीं, बल्कि सामान्य commercial shipping और बीमा लागत पर भी दबाव बना रह सकता है।

क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ रहा है?

अभी इसे “तीसरा विश्व युद्ध” घोषित करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। लेकिन खतरा इस बात का है कि संघर्ष का दायरा लगातार समुद्री व्यापार, तेल निर्यात और दूसरे देशों की सुरक्षा तक फैल रहा है।

अमेरिका और ईरान की सीधी सैन्य भिड़ंत, Hormuz में कम होती जहाजों की आवाजाही और तेल की बढ़ती कीमतें बताती हैं कि इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं है। Reuters ने भी मौजूदा स्थिति को ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजार के लिए जोखिमपूर्ण बताया है।

यानी सवाल अब केवल यह नहीं है कि अमेरिका और ईरान की अगली मिसाइल कब चलेगी। बड़ा सवाल यह है कि क्या दोनों देश फिर बातचीत की मेज पर लौटेंगे या Hormuz का समुद्री मोर्चा युद्ध को और बड़े क्षेत्रीय संकट में बदल देगा।

SOURCE: U.S. Central Command (CENTCOM) | Reuters | Financial Times

PHOTO / VIDEO: U.S. Central Command

(CENTCOM) / DVIDS — Public Domain

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यह समाचार U.S. Central Command द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी और वीडियो तथा Reuters सहित उपलब्ध विश्वसनीय समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। सैन्य कार्रवाई, हमले और उससे जुड़े दावे संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं। India Time Report TV™ का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग करना है। India Time Report TV™ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है।

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By India Time Report TV Desk

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