नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्रों का दृश्यनेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद प्रभावित क्षेत्र का दृश्य।

UN ने दी गंभीर चेतावनी—कई इलाकों में रास्ते और घर मलबे में दबे, प्रभावित लोगों तक पहुंचना अब भी बेहद मुश्किल

सुरक्षित पानी और स्वास्थ्य सेवाओं का संकट गहराया, WHO ने बीमारी फैलने के जोखिम को लेकर किया अलर्ट

नेपाल में विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अब भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अधिकारियों के मुताबिक, नेपाल में आपदा से मरने वालों की संख्या 987 तक पहुंच गई है और राहत एवं बचाव अभियान अभी जारी है। प्रभावित इलाकों में लगातार बारिश, अवरुद्ध जलमार्ग और भूस्खलन का खतरा बचाव कार्यों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय जिनेवा की 1 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल-चीन सीमा के पास ग्लेशियर ढहने और भूस्खलन के बाद आई तबाही ने कई इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता समन्वय कार्यालय यानी OCHA ने मृतकों का आंकड़ा 987 बताया है।

मलबे में दबे घर, कटे हुए इलाके

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रेड क्रॉस और रेड क्रिसेंट सोसाइटीज के नेपाल संकट अभियान से जुड़े अधिकारी के मुताबिक, रासुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे प्रभावित जिलों में सड़कें, वाहन और पूरे घर तक भारी मात्रा में कीचड़ और मलबे के नीचे दबे हैं। कई समुदायों तक पहुंचना बेहद कठिन हो गया है और जिन रास्तों पर पहले कुछ मिनट लगते थे, वहां अब कई घंटे लग रहे हैं।

देखिए नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही के दृश्य और राहत-बचाव अभियान की स्थिति।
Credit VIDEO: UN Geneva / UNTV CH

महिलाओं और कमजोर वर्गों पर ज्यादा असर

UN Women ने प्रभावित इलाकों में महिलाओं और लड़कियों के सामने बढ़ती मुश्किलों को भी रेखांकित किया है। सुरक्षित पानी की व्यवस्था, सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त होने से कई परिवारों के लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो गया है। गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं और दिव्यांग लोगों जैसे संवेदनशील समूहों पर आपदा का असर विशेष रूप से गंभीर बताया गया है।

WHO ने बीमारी फैलने का खतरा बताया

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि बाढ़, विस्थापन, भीड़भाड़ और जमा हुआ पानी आगे चलकर स्वास्थ्य संकट को बढ़ा सकते हैं। WHO प्रभावित और निचले इलाकों में निगरानी कर रहा है ताकि डेंगू, स्क्रब टाइफस और दूसरी संक्रामक बीमारियों के संभावित बढ़ते खतरे पर नजर रखी जा सके। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, छह स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, जबकि दो अन्य तक पहुंच संभव नहीं है।

नेपाल में राहत और बचाव अभियान जारी है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों के अनुसार प्रभावित इलाकों में पहुंच, सुरक्षित पानी, स्वास्थ्य सेवाओं और आगे आने वाली बारिश तथा भूस्खलन के खतरे के कारण संकट अभी खत्म नहीं हुआ है।

SOURCE: UNTV CH / UN Geneva

PHOTO: UNTV CH / UNIFIL

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By India Time Report TV Desk

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