जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र की ब्रीफिंग के दौरान यमन की स्थिति पर जानकारी देते अधिकारीयमन में बढ़ते संघर्ष और मानवीय संकट पर संयुक्त राष्ट्र की जेनेवा ब्रीफिंग का दृश्य।

UN की जेनेवा ब्रीफिंग में मानवीय संकट की तस्वीर सामने आई, पश्चिमी तट और ताइज़ में बड़ी संख्या में लोग घर छोड़ने को मजबूर

UNHCR ने बताया—समुद्री रास्ते से जिबूती पहुंचे हजारों लोग, WHO ने स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ते दबाव की जानकारी दी

यमन में संघर्ष बढ़ा, हजारों परिवार हुए विस्थापित

यमन में हालिया संघर्ष बढ़ने के बाद मानवीय संकट गहराता दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, दो सप्ताह के भीतर 1.12 लाख से अधिक लोग यमन के भीतर विस्थापित हुए हैं। सबसे ज्यादा प्रभाव पश्चिमी तट और ताइज़ क्षेत्र में बताया गया है।

18 सितंबर को जेनेवा में हुई संयुक्त राष्ट्र की ब्रीफिंग में अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM), संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR), संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA), संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधियों ने यमन की स्थिति पर जानकारी दी।

1.12 लाख से ज्यादा लोग हुए विस्थापित

IOM की जानकारी के मुताबिक, यमन में 1,12,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं। IOM के अनुसार इनमें बड़ी संख्या पिछले करीब दो सप्ताह में विस्थापित हुए लोगों की है। ताइज़ सहित पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में संघर्ष का असर सामने आया है।

संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों ने बताया कि कई परिवारों के सामने संघर्ष वाले इलाकों में रहने और सुरक्षित जगह की तलाश में घर छोड़ने के बीच मुश्किल स्थिति बनी हुई है।

समुद्र पार कर जिबूती पहुंचे करीब 3 हजार लोग

संघर्ष के बीच यमन से बड़ी संख्या में लोग समुद्र के रास्ते जिबूती भी पहुंचे हैं। UNHCR के अनुसार एक सप्ताह से भी कम समय में करीब 3,000 लोग जिबूती पहुंचे, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं। कई लोगों ने छोटे और भीड़भरे नावों से खतरनाक समुद्री यात्रा की।

यमन में बढ़ते संघर्ष, विस्थापन और जिबूती पहुंचे लोगों की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की जानकारी। | UNOG / UN

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बढ़ा दबाव

WHO ने बताया कि यमन की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही संघर्ष, विस्थापन, बीमारी और सीमित स्वास्थ्य सेवाओं के दबाव में है। मौजूदा स्थिति के कारण आपातकालीन और आघात संबंधी चिकित्सा जरूरतें बढ़ रही हैं, जबकि स्वास्थ्यकर्मियों, उपकरणों, वित्तीय संसाधनों और चिकित्सा सामग्री की कमी बनी हुई है।

WHO के अनुसार यमन में हैजा, खसरा, डेंगू, डिप्थीरिया, कुपोषण और संघर्ष से जुड़ी चोटों सहित कई स्वास्थ्य जोखिम मौजूद हैं।

महिलाओं और बच्चों के लिए बढ़ी मुश्किल

UNFPA ने यमन में महिलाओं और लड़कियों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर भी जानकारी दी। एजेंसी के अनुसार विस्थापन के बीच गर्भवती महिलाओं के लिए प्रसव पूर्व और प्रसव बाद की देखभाल, आपातकालीन प्रसूति सेवाएं और अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन रहा है।

संयुक्त राष्ट्र की ब्रीफिंग में एक ऐसी महिला का भी जिक्र किया गया, जिसने विस्थापन के दौरान खुले में बच्चे को जन्म दिया और उसे पर्याप्त आश्रय तथा चिकित्सा सहायता उपलब्ध नहीं थी।

UN ने मानवीय सहायता बढ़ाने की जरूरत बताई

UN अधिकारियों ने यमन में प्रभावित लोगों तक भोजन, पानी, आश्रय, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी सहायता पहुंचाने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय सहायता की पहुंच सुनिश्चित करने की अपील की गई।

जिबूती में पहुंचे लोगों की संख्या बढ़ने से वहां भी स्थानीय संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। UNHCR और IOM के अनुसार नए पहुंचे लोगों के लिए अस्थायी आश्रय, भोजन, पानी, स्वास्थ्य और सुरक्षा सहायता की जरूरत है।

SOURCE: UN Geneva

VIDEO/PHOTO: UNOG / UN । Newsroom

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यह समाचार संयुक्त राष्ट्र और उसकी संबंधित एजेंसियों द्वारा 18 सितंबर 2026 को जेनेवा में दी गई आधिकारिक जानकारी पर आधारित है। यमन में संघर्ष और विस्थापन की स्थिति तेजी से बदल रही है, इसलिए आंकड़े समय के साथ अपडेट हो सकते हैं। Feature Image और वीडियो में संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सामग्री का उपयोग किया गया है। India Time Report TV™ का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक, निष्पक्ष और जिम्मेदार रिपोर्टिंग करना है। India Time Report TV™ का उद्देश्य किसी व्यक्ति, संगठन या राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध करना नहीं है।

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By India Time Report TV Desk

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